धर्मो वृषस्य रूपेण स्थितो देवस्य शङ्करः।
नन्दी तस्मात् सदा सेव्यो भक्त्या ध्यानपरायणैः॥
भावार्थ:
धर्म स्वयं वृषभ रूप में भगवान शंकर के समीप स्थित है।
अतः जो भक्त ध्यान और भक्ति में स्थिर होना चाहता है,
उसे नंदी के गुणों का आश्रय अवश्य लेना चाहिए।
हर हर महादेव।
नन्दी तस्मात् सदा सेव्यो भक्त्या ध्यानपरायणैः॥
भावार्थ:
धर्म स्वयं वृषभ रूप में भगवान शंकर के समीप स्थित है।
अतः जो भक्त ध्यान और भक्ति में स्थिर होना चाहता है,
उसे नंदी के गुणों का आश्रय अवश्य लेना चाहिए।
हर हर महादेव।
धर्मो वृषस्य रूपेण स्थितो देवस्य शङ्करः।
नन्दी तस्मात् सदा सेव्यो भक्त्या ध्यानपरायणैः॥
भावार्थ:
धर्म स्वयं वृषभ रूप में भगवान शंकर के समीप स्थित है।
अतः जो भक्त ध्यान और भक्ति में स्थिर होना चाहता है,
उसे नंदी के गुणों का आश्रय अवश्य लेना चाहिए।
🕉️ हर हर महादेव।