अनुवाद ने परंपरा को मारा (Translation Killed Tradition):
अंग्रेजी के सीमित शब्दों ने संस्कृत के गहरे भावों की हत्या कर दी। 'धर्म' रिलीजन नहीं है, 'मूर्ति' आइडल नहीं है, और 'वर्ण' कास्ट नहीं है। शब्दों की यह भूल ही आज के सांस्कृतिक भ्रम की जड़ है।
#SatireGuruji
अंग्रेजी के सीमित शब्दों ने संस्कृत के गहरे भावों की हत्या कर दी। 'धर्म' रिलीजन नहीं है, 'मूर्ति' आइडल नहीं है, और 'वर्ण' कास्ट नहीं है। शब्दों की यह भूल ही आज के सांस्कृतिक भ्रम की जड़ है।
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अनुवाद ने परंपरा को मारा (Translation Killed Tradition):
अंग्रेजी के सीमित शब्दों ने संस्कृत के गहरे भावों की हत्या कर दी। 'धर्म' रिलीजन नहीं है, 'मूर्ति' आइडल नहीं है, और 'वर्ण' कास्ट नहीं है। शब्दों की यह भूल ही आज के सांस्कृतिक भ्रम की जड़ है।
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