सुप्रभात अंतर्जाल परिवार
जटाओं में काल ठहरा है,
माथे पर चन्द्र मौन धरे।
नेत्र अर्धनिमीलित हैं,
जैसे सृष्टि स्वयं ध्यान करे।
भस्म नहीं, वह सत्य लिपटा है,
जो देह नहीं— अहं जलाए।
कंठ में विष, हृदय में करुणा,
महादेव यही संतुलन सिखाए।
त्रिशूल नाश का नहीं,
अधर्म के अंत का वचन है।
डमरू की हर ध्वनि कहती है,
आरंभ और अंत एक क्षण है।
न सिंहासन, न स्वर्ण आभूषण,
श्मशान उनका वैभव है।
जो सब कुछ त्याग सके,
वही वास्तव में महादेव है।
भावार्थ:
महादेव किसी रूप में बंधे नहीं—
वे चेतना, वैराग्य, संतुलन और सत्य का जीवंत स्वरूप हैं।
उनका चित्रण बाह्य नहीं, आंतरिक जागरण है।
हर हर महादेव हर जीव में महादेव
#sanatandharm #harharmahadev #randomguptchar #SatireGuruji #motivation
जटाओं में काल ठहरा है,
माथे पर चन्द्र मौन धरे।
नेत्र अर्धनिमीलित हैं,
जैसे सृष्टि स्वयं ध्यान करे।
भस्म नहीं, वह सत्य लिपटा है,
जो देह नहीं— अहं जलाए।
कंठ में विष, हृदय में करुणा,
महादेव यही संतुलन सिखाए।
त्रिशूल नाश का नहीं,
अधर्म के अंत का वचन है।
डमरू की हर ध्वनि कहती है,
आरंभ और अंत एक क्षण है।
न सिंहासन, न स्वर्ण आभूषण,
श्मशान उनका वैभव है।
जो सब कुछ त्याग सके,
वही वास्तव में महादेव है।
भावार्थ:
महादेव किसी रूप में बंधे नहीं—
वे चेतना, वैराग्य, संतुलन और सत्य का जीवंत स्वरूप हैं।
उनका चित्रण बाह्य नहीं, आंतरिक जागरण है।
हर हर महादेव हर जीव में महादेव
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सुप्रभात अंतर्जाल परिवार 🙏🚩🕉️
जटाओं में काल ठहरा है,
माथे पर चन्द्र मौन धरे।
नेत्र अर्धनिमीलित हैं,
जैसे सृष्टि स्वयं ध्यान करे।
भस्म नहीं, वह सत्य लिपटा है,
जो देह नहीं— अहं जलाए।
कंठ में विष, हृदय में करुणा,
महादेव यही संतुलन सिखाए।
त्रिशूल नाश का नहीं,
अधर्म के अंत का वचन है।
डमरू की हर ध्वनि कहती है,
आरंभ और अंत एक क्षण है।
न सिंहासन, न स्वर्ण आभूषण,
श्मशान उनका वैभव है।
जो सब कुछ त्याग सके,
वही वास्तव में महादेव है।
🕉️ भावार्थ:
महादेव किसी रूप में बंधे नहीं—
वे चेतना, वैराग्य, संतुलन और सत्य का जीवंत स्वरूप हैं।
उनका चित्रण बाह्य नहीं, आंतरिक जागरण है।
हर हर महादेव 🙏 हर जीव में महादेव 🙏
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