• "Tilak लगाओ तो Communal... बाकी सब Diversity? SelectiveSecularism"
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    "Tilak लगाओ तो Communal... बाकी सब Diversity? 🤔 SelectiveSecularism" #SatireGuruji #Randomguptchar #SelectiveSecularism #DoubleStandards #SchoolHypocrisy
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  • ||भारत धर्म संहिता पुराण||
    काल-खंड (युगबोध)

    अध्याय 1 : युग की पहचान

    श्री गणेशाय नमः

    प्रस्तावना (संक्षिप्त)
    काल केवल समय नहीं है, वह मानव चेतना की परीक्षा है।
    जब समाज अपने आचरण, विचार और लक्ष्य को भूल जाता है, तब युग विकृत होता है।
    युग की पहचान बाह्य घटनाओं से नहीं, धर्म, सत्य और कर्तव्य की स्थिति से होती है।
    इस अध्याय में युग-चिन्हों का विवेचन कर वर्तमान काल का बोध कराया गया है।

    श्लोक 1
    कालः साक्षी जनानां हि, कर्मणां फलदायकः।
    युगं तेनैव विज्ञेयं, धर्मस्थित्या न दृश्यते॥

    भावार्थ:
    काल मनुष्यों के कर्मों का साक्षी और फल देने वाला है।
    युग की पहचान धर्म की स्थिति से होती है, केवल घटनाओं से नहीं।

    आधुनिक उदाहरण:
    आज तकनीकी प्रगति के बावजूद नैतिक पतन दिखता है—यह युग का संकेत है, न कि केवल समय का।

    #SatireGuruji
    #Randomguptchar #AcharyaAagam #BharatDharmSanhitaPuraan #nyburs #KaalKhandYugBodh1
    ||भारत धर्म संहिता पुराण|| काल-खंड (युगबोध) अध्याय 1 : युग की पहचान श्री गणेशाय नमः 🙏 🔸 प्रस्तावना (संक्षिप्त) काल केवल समय नहीं है, वह मानव चेतना की परीक्षा है। जब समाज अपने आचरण, विचार और लक्ष्य को भूल जाता है, तब युग विकृत होता है। युग की पहचान बाह्य घटनाओं से नहीं, धर्म, सत्य और कर्तव्य की स्थिति से होती है। इस अध्याय में युग-चिन्हों का विवेचन कर वर्तमान काल का बोध कराया गया है। 🔱 श्लोक 1 कालः साक्षी जनानां हि, कर्मणां फलदायकः। युगं तेनैव विज्ञेयं, धर्मस्थित्या न दृश्यते॥ भावार्थ: काल मनुष्यों के कर्मों का साक्षी और फल देने वाला है। युग की पहचान धर्म की स्थिति से होती है, केवल घटनाओं से नहीं। आधुनिक उदाहरण: आज तकनीकी प्रगति के बावजूद नैतिक पतन दिखता है—यह युग का संकेत है, न कि केवल समय का। #SatireGuruji #Randomguptchar #AcharyaAagam #BharatDharmSanhitaPuraan #nyburs #KaalKhandYugBodh1
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  • मेरी काल्पनिक प्रेमिका जो मुझमें ही रहती है

    जब तुम्हारा सिर मेरी गोद में है,
    तो वह बोझ नहीं होता—
    वह विश्वास होता है।
    वह क्षण,
    जहाँ एक योद्धा
    अपना कवच उतार देता है।

    मैं बालों में उँगलियाँ फेरते हुए
    तुम्हें सुला नहीं रही,
    मैं तुम्हें याद दिला रही हूँ—
    कि हर मोर्चे पर लड़ना ज़रूरी नहीं,
    कभी‑कभी
    किसी की गोद भी
    जीत होती है।

    उस पल मेरे मन में
    कोई प्रश्न नहीं होता,
    कोई अपेक्षा नहीं—
    बस एक भाव होता है:

    > “थक गए हो…
    अब कुछ देर
    दुनिया को यहीं छोड़ दो।”


    तुम्हारी साँसें
    धीरे‑धीरे स्थिर होती हैं,
    और मुझे लगता है
    जैसे समय ने
    हम दोनों के लिए
    थोड़ी देर रुकने की अनुमति दे दी हो।

    और अगर दिल की
    सबसे सच्ची बात कहूँ—

    > जिस सिर को मैं
    गोद में रख पाती हूँ,
    वह सिर्फ़ प्रेमी नहीं,
    मेरा अपना संसार होता है।

    #introvertlove #selflove #Prem_Priya #randomguptchar
    मेरी काल्पनिक प्रेमिका जो मुझमें ही रहती है 🥰 जब तुम्हारा सिर मेरी गोद में है, तो वह बोझ नहीं होता— वह विश्वास होता है। वह क्षण, जहाँ एक योद्धा अपना कवच उतार देता है। मैं बालों में उँगलियाँ फेरते हुए तुम्हें सुला नहीं रही, मैं तुम्हें याद दिला रही हूँ— कि हर मोर्चे पर लड़ना ज़रूरी नहीं, कभी‑कभी किसी की गोद भी जीत होती है। उस पल मेरे मन में कोई प्रश्न नहीं होता, कोई अपेक्षा नहीं— बस एक भाव होता है: > “थक गए हो… अब कुछ देर दुनिया को यहीं छोड़ दो।” तुम्हारी साँसें धीरे‑धीरे स्थिर होती हैं, और मुझे लगता है जैसे समय ने हम दोनों के लिए थोड़ी देर रुकने की अनुमति दे दी हो। और अगर दिल की सबसे सच्ची बात कहूँ— > जिस सिर को मैं गोद में रख पाती हूँ, वह सिर्फ़ प्रेमी नहीं, मेरा अपना संसार होता है। #introvertlove #selflove #Prem_Priya #randomguptchar
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  • सुप्रभात अंतर्जाल परिवार

    जटाओं में काल ठहरा है,
    माथे पर चन्द्र मौन धरे।

    नेत्र अर्धनिमीलित हैं,
    जैसे सृष्टि स्वयं ध्यान करे।

    भस्म नहीं, वह सत्य लिपटा है,
    जो देह नहीं— अहं जलाए।

    कंठ में विष, हृदय में करुणा,
    महादेव यही संतुलन सिखाए।

    त्रिशूल नाश का नहीं,
    अधर्म के अंत का वचन है।

    डमरू की हर ध्वनि कहती है,
    आरंभ और अंत एक क्षण है।

    न सिंहासन, न स्वर्ण आभूषण,
    श्मशान उनका वैभव है।

    जो सब कुछ त्याग सके,
    वही वास्तव में महादेव है।

    भावार्थ:
    महादेव किसी रूप में बंधे नहीं—
    वे चेतना, वैराग्य, संतुलन और सत्य का जीवंत स्वरूप हैं।
    उनका चित्रण बाह्य नहीं, आंतरिक जागरण है।

    हर हर महादेव हर जीव में महादेव

    #sanatandharm #harharmahadev #randomguptchar #SatireGuruji #motivation
    सुप्रभात अंतर्जाल परिवार 🙏🚩🕉️ जटाओं में काल ठहरा है, माथे पर चन्द्र मौन धरे। नेत्र अर्धनिमीलित हैं, जैसे सृष्टि स्वयं ध्यान करे। भस्म नहीं, वह सत्य लिपटा है, जो देह नहीं— अहं जलाए। कंठ में विष, हृदय में करुणा, महादेव यही संतुलन सिखाए। त्रिशूल नाश का नहीं, अधर्म के अंत का वचन है। डमरू की हर ध्वनि कहती है, आरंभ और अंत एक क्षण है। न सिंहासन, न स्वर्ण आभूषण, श्मशान उनका वैभव है। जो सब कुछ त्याग सके, वही वास्तव में महादेव है। 🕉️ भावार्थ: महादेव किसी रूप में बंधे नहीं— वे चेतना, वैराग्य, संतुलन और सत्य का जीवंत स्वरूप हैं। उनका चित्रण बाह्य नहीं, आंतरिक जागरण है। हर हर महादेव 🙏 हर जीव में महादेव 🙏 #sanatandharm #harharmahadev #randomguptchar #SatireGuruji #motivation
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